हर बच्चा शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन का हकदार है — मजदूरी का नहीं। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर रामगढ़ जिले में अग्रगति, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न के साथ पहल की— क्या हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन मिल सकता है, यदि समाज बाल श्रम के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा हो जाए? इसी उद्देश्य से चलाए गए अभियान के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों में कार्यरत 12 एवं 13 वर्ष आयु के 02 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया। जांच में पाया गया कि बच्चे असुरक्षित एवं शोषणकारी परिस्थितियों में कार्य कर रहे थे, जिससे उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। बच्चों के बचाव के बाद कानूनी कार्रवाई प्रारंभ की गई तथा उनके पुनर्वास और अधिकारों को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन यह पहल केवल बचाव तक सीमित नहीं रही। डीएलएसए रामगढ़ में नेशनल एंटी ट्रैफिकिंग कैंपेन के तहत आयोजित बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम में मो. तौफ़ीकुल हसन (जिला न्यायाधीश), श्री अनिल कुमार (सचिव, डीएलएसए), श्री अनिल कुमार रंजन (श्रम अधीक्षक), श्री रंजीत कुमार (सदस्य, डीसीपीयू) एवं श्री किरण शंकर दत्त (निदेशक, अग्रगति) सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने बाल अधिकार, बाल संरक्षण, बाल श्रम उन्मूलन एवं बाल तस्करी की रोकथाम पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान इशरत जहां एवं रविंद्र कुमार (पीएलवी) ने समुदाय के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बाल श्रम और बाल तस्करी की घटनाओं की सूचना तत्काल संबंधित विभागों तक पहुँचाने की अपील की। एक क्षण विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा— जब उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और अवसर मिलेगा, न कि मजदूरी और शोषण। यह केवल दो बच्चों की मुक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज की ओर बढ़ाया गया कदम है जहाँ हर बच्चा अपने सपनों को जी सके। ✨ बाल श्रम बच्चों से उनका बचपन छीनता है। आइए, मिलकर ऐसा समाज बनाएं जहाँ हर बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानित हो।
























